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traval guru

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Friday, 28 September 2012


अब तो अपनों से ही लगता है डर 

अंधेरे से डरा हुआ आदमी जोर-जोर से बोलता है। वह अंधेरे में अपनी ही आवाज सुनना चाहता है। कोई और आवाज उसे और डराती है। झिंगुर की आवाज भी उसे शेर के आने के आहट जैसी लगती है। केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील  गठवबंधन की सरकार का हाल भी ऐसा है। सरकार को अपना भविश्य अंधकारमय नजर आ रहा है।इसलिए वह विरोध की किसी भी आवाज को सत्ता की ताकत से दबा देना चाहती है। वह कार्टूनिस्ट पर देषद्रोह का मुकदमा चलाती है। सुप्रीम कोर्ट को अपने दायरे में रहने की चेतावनी देती है। चुनाव आयोग की बात मानने से इंकार करती है और सीएजी उसे अपने विरोध दल के एजेंट के रुप में दिखाई देता है। यह सरकार विरोधियों से ही नहीं अपने और अपनों से डरी हुई है। ऐसे में इस बात की परवाह किए बिना कि उसकी बात कोई नहीं सुन रहा और उस पर याकीन भी नहीं कर रहा। वह पूरी ताकत से चीख रही है।
कांग्रेस इस समय 1974 की मानसिकता में चली गई है। वह एक बार फिर पार्टी और सरकार को देष का पर्याय मानने लगी है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अक्षम और अति भ्रश्ट सरकार का मुखिया बताने वाले विदेषी पत्रकार उसे देष के खिलाफ शणयंत्र करने वाले नजर आ रहे हैं। इसलिए कांग्रेा के प्रवक्ता संवैधानिक संस्थाओं पर खुलेआम हमला कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन की इसमे मूक सहमति है। सरकार में बैठे लोग सच्चाई को देखने और स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। कोयला घोटाले पर सरकार के सारे तर्क, बचाव और आक्रमणकी सारी दलीलें  2जी घोटाले की याद दिलाती हैं। उस समय भी कांग्रेस ऐसी ही आक्रामक मुद्रा में थी । 2जी से कोलगेट का सफर जीरो लाॅस से नो लाॅस का सफर है। 2जी मामले में उसकी आक्रमकता की आग पर पानी सुप्रीम कोर्ट के फैसलें से पड़ा। कोयला घोटाले में रोज एक नया खुलासा हो रहा है। कांग्रेस के पास तीन तर्क हैं। उक-सीएजी ने दायरे से बाहर जाकर काम किया और घाटे के काल्पनिक आंकड़े दिए। दो-प्रधानमंत्री ने कुछ गलत नहीं किया और आवंटन की नीति भाजपा के मुख्यमंत्रियों की मांग पर अपनाई। तीन-जो भी घोटाला हुआ भाजपा षासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने किया। इसके बावजूद सरकार किसी कोयला ब्लाक के आवंटन को रद्द नहीं करेगी। भाजपा षासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों पर जिस घोटाले का आरोप केन्द्र सरकार लगा रही है उसकी भी जांच कराने को तैयार नहीं है। केद्रीय सर्तकता आयोग के निर्देष पर सीबीआई जो जांच कर रही है सरकार उससे भी असहज महसूस कर रही है।
विरोध में उठने वाली हर आवाज को दबाने की कोषिष का ही नतीजा है कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के खिलाफ देषद्रोह का मामला दायर करना। ऐसा करने वाले भूल गए या जानबूझकर याद नहीं रखा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला है कि राश्ट्रीय प्रतीकों का अपमान कानून की नजर में अपराध नहीं है। सोषल मीडिया पर प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष के बारे में कार्टून बनते हैं तो सरकार सोषल मीडिया को सेंसर करनें का प्रयास करती है। कांग्रेस प्रवक्ता मनीश तिवारी को इस बात पर ऐतराज है कि भारतीय मीडिया टाइम, न्यूजवीक और वाषिंगटन पोस्ट जैेसे विदेषी प्रकाषनों की टिप्प्णियों पर ध्या नही क्यों देता है। इतना ही नहीं भारतीय अर्थव्यवस्था पर अंतराश्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों की रिपोर्ट को वह महत्त्व नहीं देना चाहते। उनके कहने का निहितार्थ यह है कि टिप्प्णियों पर सरकार ध्यान नहीं देती, आप विदेषी मीडिया को नजर अंदाज कीजिए और सब कुछ सामान्य ढंग से चलते रहने दीजिए।
इस सबमें सबसे ज्यादा चिंता की बात संवैधानिक संस्थाओं पर हमले। कांग्रेस पार्टी षायद यह भूल रही है कि संवैधानिक संस्थाएं वही कर रही हैं जो संविधान उनसे अपेक्षा करता है। वह समस्या की महज संदेषवाहक हैं, समस्या नहीं। समस्या कहीं और है। जिन्होंने रामचरित मानस पढ़ा है वे जानते है कि हनुमान7 रावण के पास भगवान का संदेष लेकर गए थे ।रावण नें उनकी पूंछ में आग लगा दी। नतीजा क्या हुआ सबको पता है। अच्छा होगा कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं की पूंछ में आग लगाने की अपनी आदत छोड़ दे । वामपंथियों के बारे  में कांग्रेसी कहते हैं  िकवह अपनी गलती देर से स्वीकार करते हैं । माकपा नेता और पष्चिम बंगाल के पूर्व वित्त मंत्री अषोक मित्र ने हाल ही में स्वीकार किया है कि उनके वामपंथी साथी प्रदेष की जनता को मित्र की बजाय गुलाम समझने लगे थे, लेकिन इतिहास बताता है कि कांग्रेस अपनी गलती से नहीं सीखती । ऐसे में जो सही रास्ता दिखाने की कोषिष करता है वह उसे संदेह की नजर से देखती है।
भ्रश्टाचार और घोटाले के आरोपो के मामले को एक बार छोड़ भी दे तो संप्रग सरकार के सामने समस्याओं का अंबार लगा है। महंगाई बढ रही है, विकास दर लगातार घट रही है, आथिक समानता बढ रही है। विदेषी और देशी निवेश घट रहा है। ढांचागत परियोजनाएं लटकी हुई हैं। विदेष व्यापार घाटे में इजाफा हो रहा है।  राजकोशिये घाटा थमने का नाम नहीं ले रहा है। फिर भी सरकार मानने को तैयार नहीं है कि उससे कहीं कुछ गलती हुई है।
कांग्रेस पार्टी और उसके नेतृव्व वाली संप्रग सरकार ऐसे मुकाम पर पहुंच गई है, जहां उन्हें सारा जहां अपना दुष्मन नजर आ रहा है। एक समय था जब पूरी दुनिया के देशो  की नजर भारत पर थी । अभी 2010 में अमेरिका के राश्ट्रपति अराक ओबामा ने भारतीय संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत उभर नहीें रहा, उभर चुका है। अर्थषास्त्री और ईमानदार प्रधानमंत्री भ्रश्टाचार के आरोपों से घिरे हुए हैं। राजनीति उनका कमजोर पक्ष है यह तो सबको पता था लेकिन अर्थषास्त्र के मौेके पर भी वह नाकाम हो जाएंगे इसकी अपेक्षा षायद ही किसी को रही होगी। तीन साल के छोटे से अर्से में पार्टी और सरकार की सबसे बढा पूंजी , मनमोहन सिंह, गले का पत्थर बनते जा रहे हैं। ऐसा गलता है या तो उन्हें कुछ सूझ ही नहीं रहा कि अब इस झमेले में कैेसे बाहर निकलें या उन्होंने मान लिया है कि चुपचाप रहकर मतदाता के फैसले का इंतजार करें। पार्टी के भले-बुरे से उनके राजनीति जीवन पर कोई आर नहीं पड़ने वाला, लेकिन क्या देष के भले बुरे की चिंता भी उन्हें परेशान  कर रही है? इस सवाल पर उनकी ख़ामोशी देश को शायद ही स्वीकार हो।
       

Wednesday, 26 September 2012


सियासत में नं. एक मुलायम 

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेष के मुख्यमंत्री अखिलेष यादव के पिता मुलायम सिंह यादव, देष में हो रही राजनीतिक दलों की सियासत में पहले स्थान पर नजर आ रहे हैं। यह हम नहीं कह रहे हैं बलिक यह उनके द्वारा ही देखने को मिला है, जहां एक ओर मुलायम सिंह कांग्रेस को समर्थन कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर वह कांग्रेस के खिलाफ भी हैं। अगर नजर डाले मौजूदा हालातों पर तो मुलायम ने वह कर दिखाया है जिसकी लोगों ने कल्पना भी नहीं की होगी।
मुलायम कहते है कि हम केंद्र  में सांप्रदायिक ताकतों को नहीं आने देंगे और साथ ही कांग्रेस पर निषाना साधते हुए कहते हैं कि हमने रिटेल में एफडीआर्इ, डीजल के मूल्यों में बढ़ोत्तरी और गैस सिलेंडरों की सीमा तय करने के खिलाफ हमने भारत बंद करने में अहम भूमिका भी निभार्इ थी।  
जहां मुलायम सिंह कांग्रेस के साथ भी हैं और उनके खिलाफ भी हैं, आखिरकार सपा मुखिया चाहते क्या हैं? क्या मुलायम सिंह कांग्रेस को बाहरी समर्थन देकर उसमे अन्दरुनी दरार डाल रहे हैं ? हो सकता है कि मुलायम सिंह यादव 2014 में होने वाले आम चुनाव की ओर अपना ध्यान केनिæत कर रहे हो, पूर्ण बहुमत से यूपी में अपनी सरकार बनाने में सफल रहे मुलायम सिंह की नजर अब लोकसभा के चुनावों पर है। क्या सपा मुखिया अपने आप को भविश्य के प्रधानमंत्री के रुप में देख रहें हैं ? अगर वह ऐसा सपना देख रहे हैं तो उनका यह सपना कभी न पूरा होने वाला सपना देख रहे हैं, क्या मुलायम सिंह यह नहीं जानते कि जब से यूपी में उनकी सरकार बनी है, यूपी अपराधों के मामले में नंबर एक पर आ गर्इ है और बात की जाए विकास और बिजली की तो मुलायम ने वह काम किया है जिससे लोगों में काफी आक्रोष है। क्या सपा को पांच जिलों से ही वोट मिले थे ? तो वह 75 जिलों पर अपना राज क्यों कर रहे है ? जिस सियासत के साथ सपा सरकार ने पांच जिलों को 24 घंटे बिजली दी है क्या उन 72 जिलों से सपा कोे वोट नहीं मिले थे तो उनको बहुमत कैसे मिल गया ? अब आम जनता को पता चल गया है कि सपा सरकार भी सांप्रदायिक की ओर कदम बढ़ाने लगी है। सपा ने यूपी का बंटवारा कर दिया है और उन्होंने पांच जिलों को तो उत्तम प्रदेष बना दिया है बाकि 72 जिलों को पीछे की ओर ढकेल दिया है। यह है सपा मुखिया की सियासत साथ अनेक राजनीतिक पार्टियों का देते हैं पर अपना काम निकालने के बाद।


Monday, 24 September 2012

आज जेल से रिहा होंगी नूपुर तलवार

 आरुषि-हेमराज मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 25 जुलाई को जेल में बंद नूपुर तलवार जेल से रिहा हो सकती हैं। 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर की जमानत मंजूर कर ली थी और 25 सितम्बर को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए थे।



आरुषि-हेमराज मर्डर केस लोगों के लिए भले ही मिस्ट्री बना हुआ हो, लेकिन आरुषि की मां नूपुर तलवार इस पर से पर्दा उठाएंगी। जेल में बंद नूपुर इस डबल मर्डर केस पर एक किताब लिख रही हैं, जो एक तिहाई पूरी हो चुकी है।
हालांकि कोर्ट से इजाजत नहीं मिलने से वह अपनी किताब पूरी नहीं कर पाई। लेकिन जैसे ही वह जेल से बाहर होंगी, इसे पूरा करेंगी और लोगों को इस किताब के जरिये इसका सच बतायेंगी।

 
जेल में बंद रहते हुए वह सामान्य बंदियों की तरह रही,वहां उन्होंने दूसरी महिला बंदियों की हर तरह से मदद भी की। अब वह जेल में आरुषि केयर सेन्टर खोलना चाहती है, जिसकी अनुमति जेल प्रशासन से मांगी है।
इसके लिए शासन को जेल प्रशासन ने प्रस्ताव भेजा है। जेल में रहकर आरुषि मर्डर केस पर लिख रही किताब जो एक तिहाई पूरी हो चुकी है,उसे बाहर आकर ही पूरा करेंगी।


Sunday, 23 September 2012

बिहार : नाराज शिक्षको ने नितीश कुमार को दिखाई चप्पलें


बिहार के मधुबनी में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को निविदा (कॉन्ट्रेक्ट) पर रखे गए शिक्षकों की नाराजगी की सामना करना पड़ा, जब रविवार को इन लोगों ने एक कार्यक्रम के दौरान उन्हें चप्पलें दिखाईं।

मिली जानकारी के अनुसार अपनी अधिकार यात्रा के दौरान नीतीश रविवार को मधुबनी में थे, और इसी दौरान नियमित शिक्षकों से वेतन और भत्तों की बराबरी की मांग कर रहे निविदा शिक्षक विरोध जताने के लिए कार्यक्रम में पहुंच गए। जब नीतीश उनसे मिलने नहीं पहुंचे, नाराज शिक्षकों ने चप्पलें दिखाकर आक्रोश व्यक्त किया।

 यह चौथी बार है, जब निविदा पर रखे गए शिक्षकों ने नीतीश कुमार का विरोध किया है। इससे पहले, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर में भी निविदा शिक्षकों ने विरोध प्रदर्शन किए थे।

वहीं, मुख्यमंत्री ने निविदा शिक्षकों को भड़काने के लिए विपक्ष को दोषी ठहराया है। उनका कहना है कि राजनीति चमकाने के लिए विपक्ष यह सब हथकंडे अपना रहा है।
















Friday, 21 September 2012

रेल मंत्रालय अपने पास रखेगी सरकार

 रेल मंत्रालय को अपने पास रखने का मन बना चुकी कांग्रेस इसको किसी तेजतर्रार नेता को सुपुर्द कर सकती है। स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद की वैसे तो सरकार से संगठन में जाने की चर्चा थी, लेकिन यह बड़ा मंत्रालय उनको दिया जा सकता है। आजाद के अलावा ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश का नाम भी रेलवे के लिए विचार में है।

ममता बनर्जी और कांग्रेस में सुलह की संभावना खत्म होने के बाद केंद्र में तृणमूल कांग्रेस के छह मंत्री आज तीन बजे प्रधानमंत्री को इस्तीफा सौंप देंगे। जाहिर है ममता के 19 सांसदों के समर्थन के बिना सरकार अधूरी रह जाएगी , लेकिन कांग्रेस के नेता दावा कर रहे हैं कि सरकार को कोई खतरा नहीं है।

यूपीए में पहले से ही आधा दर्जन मंत्रालय खाली पड़े हुए हैं। अब ममता के छह मंत्रियों के इस्तीफे के बाद एक दर्जन पद खाली हो जाएंगे। इसके अलावा कई मंत्रियों के विभागों को बदलना है तो कुछ को संगठन में भी भेजे जाने की पूरी संभावना है। मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारियों के बीच सरकार ने अपने कैबिनेट मंत्रियों के विदेश दौरे भी रद कर दिए हैं।

Wednesday, 19 September 2012


BJP, SP, जेडीयू ने किया ट्रेनों का चक्का जाम 


नई दिल्ली।  घर से बाहर जरा संभलकर निकलें। 
आज भारत बंद है,
 
 डीजल, रसोई गैस और रिटेल में एफडीआई के विरोध में बीजेपी, लेफ्ट और समाजवादी पार्टी ने अलग-अलग आज बंद का आह्वान किया है। यूपीए में शामिल डीएमके ने भी बंद का समर्थन किया है।
 


दिल्ली में बीजेपी ने बंद का आह्वान किया है। देश की राजधानी में बीजेपी जगह-जगह सड़क पर प्रदर्शन करेगी। बीजेपी के साथ ही ऑल इंडिया ट्रेडर्स यूनियन, तमाम व्यापारिक संगठन व ऑटो और टैक्सी यूनियन भी बंद को समर्थन दे रही हैं। दिन निकलने के साथ बंद का असर दिख सकता है। बीजेपी की आज दिल्ली के तमाम इलाकों में सड़कों को जाम कर पुतला फूंकने की तैयारी है।



वाराणसी में ठीक से सुबह भी नहीं हुई थी जब समाजवादी और बीजेपी के कार्यकर्ता स्टेशन पर आकर ट्रेन रोकने लगे। यहां काफी देर तक कार्यकर्ता स्टेशन पर जमे रहे। वहीं, इलाहाबाद में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता सुबह से ही रेल रोक कर सरकारी की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। रेल रोके जाने की वजह से मुंबई-हावड़ा रेल रूट पर असर पड़ा है।
मथुरा में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने लोकल ट्रेन को कई देर तक रोके रखा और कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी भी की।

समूचे उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी समाजवादी पार्टी बंद को सफल बनाने में जुटी हुई है। जगह जगह पर एसपी और बीएसपी कार्यकर्ताओं का धरना प्रदर्शन देखा जा सकता है। जौनपुर, बांदा, बुंदेलखंड, मथुरा, इलाहाबाद, वाराणसी समेत कई जगहों पर ट्रेनें रोकी गईं हैं। राज्य सरकार की तरफ से सिर्फ तोड़फोड़ औप पत्थरबाजी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए फोर्स लगाई गई है। राज्यभर के निजी और सरकारी स्कूल किसी भी तरह के बंद से प्रभावित नहीं है।


जहानाबाद में भी बीजेपी कार्यकर्ताओं ने गंगा-दामोदर एक्सप्रेस को रोक दिया। पटना में ही राजेंद्र नगर टर्मिनल पर जेडीयू के छात्र कार्यकर्ताओं ने मालदा एक्सप्रेस को रोक दिया।



बिहार के जहानाबाद में ट्रेन रोकी गई तो पटना में भी कार्यकर्ता रेल ट्रैक पर बैठ गए। सुबह होते ही एनडीए के कार्यकर्ता रेल ट्रैक पर उतरे। दिल्ली हावड़ा रेल रूट पटना में ठप हो चुका है। पटना जंक्शन पर तीन ट्रेनें रोकी गई हैं वहीं, राजेंद्र नगर स्टेशन में तीन ट्रेनों को जेडीयू कार्यकर्ताओं ने रोक रखा है।

पटनाः एफडीआई, डीजल, और गैस सिलेंडर पर सरकार के फैसले के खिलाफ आज विपक्षी पार्टियों का भारत बंद है। पटना में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की और जबरदस्ती दुकानें बंद करवाईं। बीजेपी कार्यकर्ता यहां खुलेआम स्टेशनों पर स्टॉलों पर रखी किताबें और अखबार उड़ाते देखे गए। सत्ताधारी बीजेपी और जेडीयू एक साथ भारत बंद को सफल कराने की मुहिम में जुट गए।
मुंबई में डीजल के दाम पांच रुपए बढ़ने के विरोध में ट्रांसपोर्टर्स भी भारत बंद में शामिल हो गए हैं। पूरे महाराष्ट्र में ट्रांसपोर्टर्स इस बंद के समर्थन में हैं जिससे राज्यभर में देर रात से ही ट्रकों की लंबी कतारें देखी गईं। बंद का समर्थन करते हुए ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने बीती रात से ही एक दिन की टोकन हड़ताल करने का फैसला किया है।

BJP, SP, जेडीयू ने किया ट्रेनों का चक्का


नई दिल्ली।  घर से बाहर जरा संभलकर निकलें। 
आज भारत बंद है,
 डीजल, रसोई गैस और रिटेल में एफडीआई के विरोध में बीजेपी, लेफ्ट और समाजवादी पार्टी ने अलग-अलग आज बंद का आह्वान किया है। यूपीए में शामिल डीएमके ने भी बंद का समर्थन किया है।


दिल्ली में बीजेपी ने बंद का आह्वान किया है। देश की राजधानी में बीजेपी जगह-जगह सड़क पर प्रदर्शन करेगी। बीजेपी के साथ ही ऑल इंडिया ट्रेडर्स यूनियन, तमाम व्यापारिक संगठन व ऑटो और टैक्सी यूनियन भी बंद को समर्थन दे रही हैं। दिन निकलने के साथ बंद का असर दिख सकता है। बीजेपी की आज दिल्ली के तमाम इलाकों में सड़कों को जाम कर पुतला फूंकने की तैयारी है।



वाराणसी में ठीक से सुबह भी नहीं हुई थी जब समाजवादी और बीजेपी के कार्यकर्ता स्टेशन पर आकर ट्रेन रोकने लगे। यहां काफी देर तक कार्यकर्ता स्टेशन पर जमे रहे। वहीं, इलाहाबाद में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता सुबह से ही रेल रोक कर सरकारी की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। रेल रोके जाने की वजह से मुंबई-हावड़ा रेल रूट पर असर पड़ा है।
मथुरा में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने लोकल ट्रेन को कई देर तक रोके रखा और कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी भी की।

समूचे उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी समाजवादी पार्टी बंद को सफल बनाने में जुटी हुई है। जगह जगह पर एसपी और बीएसपी कार्यकर्ताओं का धरना प्रदर्शन देखा जा सकता है। जौनपुर, बांदा, बुंदेलखंड, मथुरा, इलाहाबाद, वाराणसी समेत कई जगहों पर ट्रेनें रोकी गईं हैं। राज्य सरकार की तरफ से सिर्फ तोड़फोड़ औप पत्थरबाजी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए फोर्स लगाई गई है। राज्यभर के निजी और सरकारी स्कूल किसी भी तरह के बंद से प्रभावित नहीं है।


जहानाबाद में भी बीजेपी कार्यकर्ताओं ने गंगा-दामोदर एक्सप्रेस को रोक दिया। पटना में ही राजेंद्र नगर टर्मिनल पर जेडीयू के छात्र कार्यकर्ताओं ने मालदा एक्सप्रेस को रोक दिया।



बिहार के जहानाबाद में ट्रेन रोकी गई तो पटना में भी कार्यकर्ता रेल ट्रैक पर बैठ गए। सुबह होते ही एनडीए के कार्यकर्ता रेल ट्रैक पर उतरे। दिल्ली हावड़ा रेल रूट पटना में ठप हो चुका है। पटना जंक्शन पर तीन ट्रेनें रोकी गई हैं वहीं, राजेंद्र नगर स्टेशन में तीन ट्रेनों को जेडीयू कार्यकर्ताओं ने रोक रखा है।

पटनाः एफडीआई, डीजल, और गैस सिलेंडर पर सरकार के फैसले के खिलाफ आज विपक्षी पार्टियों का भारत बंद है। पटना में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की और जबरदस्ती दुकानें बंद करवाईं। बीजेपी कार्यकर्ता यहां खुलेआम स्टेशनों पर स्टॉलों पर रखी किताबें और अखबार उड़ाते देखे गए। सत्ताधारी बीजेपी और जेडीयू एक साथ भारत बंद को सफल कराने की मुहिम में जुट गए।
मुंबई में डीजल के दाम पांच रुपए बढ़ने के विरोध में ट्रांसपोर्टर्स भी भारत बंद में शामिल हो गए हैं। पूरे महाराष्ट्र में ट्रांसपोर्टर्स इस बंद के समर्थन में हैं जिससे राज्यभर में देर रात से ही ट्रकों की लंबी कतारें देखी गईं। बंद का समर्थन करते हुए ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने बीती रात से ही एक दिन की टोकन हड़ताल करने का फैसला किया है।

Tuesday, 18 September 2012

पत्नी के प्रेमी का क़त्ल

मुरादाबाद , कटघर  के पीतल नगरी इलाके में मंगलवार अपराहन सरेसआम बेरहमी एक युवक का क़त्ल कर दिया गया । उसे दुकान  में बंद कर चाकुओ से गोदा गया ।
कातिल को पुलिस ने मौके से खून से चाकू समेत गिरफ्तार कर लिया ।
कातिल युवक ने पत्नी से नजदीकी रिश्ते बनाने पर दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया । 
पीतल नगरी निवासी अमित वर्मा (25) एक पीतल नगरी फर्म में काम करता था । मगलवार अपराहन  ढाई बजे अमित की बिलारी के सहसपुर इलाके के रुस्तम नगर गाँव निवासी मिथुन शर्मा से कहासुनी हो गयी अ दोनों का आमना -सामना पीतल नगरी गेट के पास स्थित फोटो स्टूडियो वाली गली में हुआ । विवाद बढा तो मिथुन ने चाकू निकाल लिया । अमित जान बचाकर भागा । लगभग डेढ़ सो किलो मीटर दूर जाकर अमित मोहल्ले के ही लहीक की दूकान में घुस गया । पीछा करते हुए मिथुन भी आ गया । 

मिथुन ने चाकू से वार किया तो अमित दुकान में ही गिर गया । खून के प्यासे मिथुन ने अमित के पेट ,गर्दन ,सीने ,चेहरे ,सिर ,हाथ ,जांघ पर चाकू से वार दर्जनों वार किये । उसी दौरान  लहीक  ने दुकान बहार से बंद कर दी । सीओ कटघर केके दीक्षित और इन्स्पेक्टर अनिल सिंह यादव भी फ़ोर्स के साथ पहुच गए । दूकान का शटर उठाया तो मिथुन चाक़ू लेकर दूकान में ही था । पुलिस ने मिथुन को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया ।

Wednesday, 12 September 2012


गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अमेरिका से अच्छी खबर है। मोदी को अमेरिकी वीजा देने पर 7 साल से लगा प्रतिबंध हटवाने के लिए एक अमेरिकी सासद ने मुहिम छेड़ दी है। विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन को लिखी गई एक चिट्ठी में सासद जोए वाल्श ने कहा है कि जिस बात को लेकर मोदी को वीजा देने से इन्कार किया गया है, उसका कोई आधार नहीं है। अमेरिकी कानून में इसके बारे में कुछ भी नहीं लिखा है। सांसद ने मोदी की सराहना करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार पर अपने सख्त रुख के लिए नरेंद्र मोदी पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। उनके प्रयासों के चलते ही गुजरात में इतना विकास संभव हो पाया है। मोदी को वीजा देने से इन्कार करने के बजाय हमें उन्हें अमेरिका आमंत्रित करना चाहिए। वाल्श एक विवादास्पद हस्ती रहे हैं, जो अपने सरकार विरोधी विचारों के लिए जाने जाते हैं।
हालाकि, शिकागो में भारतीय मूल के अमेरिकी समुदाय के जो लोग मोदी का समर्थन करते हैं उनके बीच वाल्श बेहद लोकप्रिय हैं। ज्ञात है कि जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल के दौरान मोदी पर 2005 में प्रतिबंध लगाया गया था। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी मोदी पर प्रतिबंध को जारी रखा है। 2002 के गुजरात दंगों के कारण मोदी के खिलाफ इमिग्रेशन ऐंड नेशनलिटी ऐक्ट के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन को लेकर यह प्रतिबंध लगाया गया था।

मोदी बनाम राहुल की बहस को कांग्रेस ने किया खारिज

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस पूरी ताकत झोंक रही है, लेकिन इस मुकाबले में पार्टी महासचिव राहुल गांधी को आगे नहीं करेगी। उत्तर प्रदेश चुनाव के नतीजों और गुजरात की सियासी वास्तविकताओं के मद्देनजर कांग्रेस ने मोदी बनाम राहुल की बहस को ही खारिज कर दिया है।


दरअसल, कांग्रेस नेतृत्व नहीं चाहता कि गुजरात विधानसभा चुनाव में दोनों में सीधे मुकाबले का संदेश जाए। सूत्रों के मुताबिक, काग्रेस राहुल गाधी को गुजरात विधानसभा चुनावों में स्टार प्रचारक नहीं बनाएगी। वह गुजरात में प्रचार तो करेंगे, लेकिन उत्तर प्रदेश वाले अंदाज में नहीं।
वैसे गुजरात में कांग्रेस बिहार और उत्तर प्रदेश के मुकाबले इस दफा अपने लिए बेहतर स्थिति मान रही है। इसके बावजूद पार्टी राहुल की प्रतिष्ठा को इस चुनाव से जोड़ने के पक्ष में नहीं है।
दरअसल, सोशल साइट्स से लेकर पूरे देश में जिस तरह से प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी के लिए अभियान चल रहा है, उससे वह तुलना से बचना चाहती है।
काग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी से बुधवार को जब पूछा गया कि क्या राहुल गाधी गुजरात में पार्टी के लिए प्रचार करेंगे? तो उन्होंने कहा कि 'सभी राज्यों के चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं। कांग्रेस की राज्य इकाई गुजरात में चुनाव लड़ने में सक्षम है।' जाहिर है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर बेहद सतर्क है और राहुल बनाम मोदी मुकाबले की स्थिति से परहेज करेगी।
समझा जा रहा है कि बिहार और उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी के फ्लॉप शो के कारण पार्टी फिर फजीहत से बचना चाहती है। गौरतलब है कि राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जिताने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था, लेकिन अखिलेश यादव की अगुआई में समाजवादी पार्टी ने ऐतिहासित जीत दर्ज की थी।

एप्पल आईफोन-5 की 10 शानदार खूबियां

1. इस फोन में ऐपल की डिजाइन की हुई एक चिप लगी है। ये चिप इस फोन को बाकी पिछले मॉडलों के मुताबिक दोगुना शक्तिशाली बनाती है।
2. आईफोन-5 में आईफोन-4 की तरह आठ मेगापिक्सल का ही कैमरा लगा है।
3. आईफोन-5 और उसके साथ मिलने वाले सॉफ्टवेयर के जरिए कम रोशनी में पहले से ज्यादा अच्छी तस्वीरें खींजी जा सकेंगी। 
4. पूरी तरह से ग्लास और अल्युमिनियम से बने होने की वजह से आईफोन-5 बेहद हल्का और पतला है।
5. यह आईफोन-4 के मुकाबले 20 फीसदी हल्का है। 
6. पहले के आईफोन के मुकाबले हर चीज को कॉम्पैक्ट करने की कोशिश की गई है। 
7. कैमरे की बात करें तो इसमें 8 एमपी सेंसर है। 
8. एप्पल का दावा है कि नए आइफोन की इंटरनेट स्पीड सबसे ज्यादा है। 
9. नए आइफोन का डिस्पले भी आधा इंच बढ़ाकर 4 इंच किया गया है। 
10. इस आईफोन की स्क्रीन पहले से बड़ी है। इसमें यूजर आसानी से ज्यादा एप्लिकेशन देख सकते हैं।