सियासत में नं. एक मुलायम
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेष के मुख्यमंत्री अखिलेष यादव के पिता मुलायम सिंह यादव, देष में हो रही राजनीतिक दलों की सियासत में पहले स्थान पर नजर आ रहे हैं। यह हम नहीं कह रहे हैं बलिक यह उनके द्वारा ही देखने को मिला है, जहां एक ओर मुलायम सिंह कांग्रेस को समर्थन कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर वह कांग्रेस के खिलाफ भी हैं। अगर नजर डाले मौजूदा हालातों पर तो मुलायम ने वह कर दिखाया है जिसकी लोगों ने कल्पना भी नहीं की होगी।मुलायम कहते है कि हम केंद्र में सांप्रदायिक ताकतों को नहीं आने देंगे और साथ ही कांग्रेस पर निषाना साधते हुए कहते हैं कि हमने रिटेल में एफडीआर्इ, डीजल के मूल्यों में बढ़ोत्तरी और गैस सिलेंडरों की सीमा तय करने के खिलाफ हमने भारत बंद करने में अहम भूमिका भी निभार्इ थी।
जहां मुलायम सिंह कांग्रेस के साथ भी हैं और उनके खिलाफ भी हैं, आखिरकार सपा मुखिया चाहते क्या हैं? क्या मुलायम सिंह कांग्रेस को बाहरी समर्थन देकर उसमे अन्दरुनी दरार डाल रहे हैं ? हो सकता है कि मुलायम सिंह यादव 2014 में होने वाले आम चुनाव की ओर अपना ध्यान केनिæत कर रहे हो, पूर्ण बहुमत से यूपी में अपनी सरकार बनाने में सफल रहे मुलायम सिंह की नजर अब लोकसभा के चुनावों पर है। क्या सपा मुखिया अपने आप को भविश्य के प्रधानमंत्री के रुप में देख रहें हैं ? अगर वह ऐसा सपना देख रहे हैं तो उनका यह सपना कभी न पूरा होने वाला सपना देख रहे हैं, क्या मुलायम सिंह यह नहीं जानते कि जब से यूपी में उनकी सरकार बनी है, यूपी अपराधों के मामले में नंबर एक पर आ गर्इ है और बात की जाए विकास और बिजली की तो मुलायम ने वह काम किया है जिससे लोगों में काफी आक्रोष है। क्या सपा को पांच जिलों से ही वोट मिले थे ? तो वह 75 जिलों पर अपना राज क्यों कर रहे है ? जिस सियासत के साथ सपा सरकार ने पांच जिलों को 24 घंटे बिजली दी है क्या उन 72 जिलों से सपा कोे वोट नहीं मिले थे तो उनको बहुमत कैसे मिल गया ? अब आम जनता को पता चल गया है कि सपा सरकार भी सांप्रदायिक की ओर कदम बढ़ाने लगी है। सपा ने यूपी का बंटवारा कर दिया है और उन्होंने पांच जिलों को तो उत्तम प्रदेष बना दिया है बाकि 72 जिलों को पीछे की ओर ढकेल दिया है। यह है सपा मुखिया की सियासत साथ अनेक राजनीतिक पार्टियों का देते हैं पर अपना काम निकालने के बाद।
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